
कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बासनवाही में आयोजित “संकल्प समाधान शिविर” को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एक ओर क्षेत्र के किसान बुनियादी सुविधाओं और योजनाओं के लाभ के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर लापरवाही और संवेदनहीनता के आरोप लग रहे हैं।बिना सूचना के लगाया गया शिविरस्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, शिविर की पूर्व सूचना किसानों को नहीं दी गई। गांव में केवल औपचारिक रूप से पोस्टर लगाकर कार्यक्रम की जानकारी दी गई, जिससे अधिकांश किसान इस शिविर से अनजान ही रहे। परिणामस्वरूप शिविर में किसानों की भागीदारी नगण्य रही।फोटो खिंचवाने तक सीमित रहा आयोजनबताया जा रहा है कि शिविर में वास्तविक किसानों की जगह राह चलते कुछ लोगों को बैठाकर फोटो खिंचवाई गई, ताकि कागजों में उपस्थिति दर्शाई जा सके। इससे पूरे आयोजन की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।रेस्ट हाउस में अधिकारियों की ‘पार्टी’ के आरोप सबसे गंभीर आरोप यह है कि शिविर के दौरान ही जिले और ब्लॉक स्तर के कुछ अधिकारी पास के रेस्ट हाउस में मांस-मदिरा की पार्टी में व्यस्त हो गए। यदि यह आरोप सत्य साबित होते हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी की अनदेखी है बल्कि किसानों के साथ अन्याय भी है।जिला प्रशासन से उठे सवालअब सवाल यह उठता है कि क्या कांकेर जिले में कृषि विकास इसी तरह होगा? क्या किसानों के नाम पर आने वाली योजनाओं का लाभ वास्तव में उन तक पहुंच रहा है या केवल कागजों तक सीमित है?स्थानीय लोगों और किसानों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या इस प्रकार की लापरवाही पर अंकुश लगाया जा सकेगा।





