
।मलकानगिरी में बंगाली समाज की जनसभा में उमड़ा जनसैलाब, सुब्रत विश्वास ने प्रशासन और सरकार पर किया तीखा प्रहार मलकानगिरी, 26: ओडिशा के मलकानगिरी ज़िले के नारायण सेवाश्रम पटरू क्षेत्र में बंगाली समाज की एक विशाल जनसभा आयोजित की गई, जिसमें समाजसेवी बंग समाज के राष्ट्रीय संयोजक सुब्रत विश्वास मुख्य अतिथि रहे। जनसभा में बंगाली समाज के हजारों कार्यकर्ताओं और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।सुब्रत विश्वास ने मंच से मलकानगिरी में 26 दिसंबर को घटित घटना (“मलकानगिरी-26 अग्निकांड”) को लेकर कड़ी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार और प्रशासन की निष्क्रियता के कारण बंगाली हिंदुओं के 188 घर जलाए गए, लेकिन अब तक किसी अधिकारी या सुरक्षा कर्मी पर कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि “वीडियो फुटेज में स्पष्ट देखा जा सकता है कि पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में उपद्रवी घरों को जला रहे हैं और सुरक्षा बल हस्तक्षेप करने के बजाय मूकदर्शक बने रहे।”“बंगाली समाज के साथ अन्याय अब बर्दाश्त नहीं”सुब्रत विश्वास ने कहा कि बंगाली समाज के साथ यह केवल अत्याचार नहीं, बल्कि एक संगठित उत्पीड़न की कोशिश है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई नहीं की तो “भारतवर्ष के बंगाली समाज दिल्ली तक कूच करके अपना अधिकार मांगने उतरेगा।”उन्होंने कहा, “हम चुप नहीं बैठेंगे — बंगालियों को बार-बार बांग्लादेशी कहलाने का अपमान अब बर्दाश्त नहीं होगा। भारत की आज़ादी की लड़ाई में बंगाली समाज का योगदान देश कभी भूल नहीं सकता, और आज फिर वही समाज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है।”मुआवज़े की मांग और सरकार पर सवाल सुब्रत विश्वास ने इस घटना में प्रभावित परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये मुआवज़े की मांग की। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा घोषित ₹20,000 से ₹70,000 की राहत राशि “एक मज़ाक” है, जबकि “प्रत्येक परिवार को 50 लाख से लेकर 1 करोड़ तक की संपत्ति का नुकसान हुआ है।”उन्होंने बीजेपी शासित ओडिशा सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा, “जो सरकार खुद को हिंदू हितैषी कहती है, वह बंगाली हिंदू परिवारों की सुरक्षा तक नहीं कर पा रही। यह ओछी राजनीति नहीं, सीधा मानवीय अपराध है।”समाज में नई एकता की लहर इस अवसर पर बंगाली समाज के युवाओं ने सुब्रत विश्वास का जोरदार स्वागत किया। जनसभा के दौरान उपस्थिति युवाओं में जोश और एकता का माहौल देखने लायक था। जनसभा का संदेश स्पष्ट था — “अब बंगाली समाज अपने अधिकार और सम्मान के लिए एकजुट होकर संघर्ष करेगा।”





