
सुब्रत विश्वास के नेतृत्व में “आरक्षण हमारा अधिकार” मुहिम ने पकड़ी रफ़्तार — छत्तीसगढ़-उड़ीसा क्षेत्र में बंगाली समाज का जनजागरण पखांजूर, बलरामपुर पिव्ही 63, पखांजूर, कांकेर (छत्तीसगढ़): बंगाली समाज के आरक्षण अधिकार और पहचान की मांग को लेकर देशभर में चल रही मुहिम “आरक्षण हमारा अधिकार” अब छत्तीसगढ़ और उड़ीसा क्षेत्र में भी एक बड़े सामाजिक आंदोलन के रूप में उभर रही है। इस अभियान का नेतृत्व बंगाली युवा नेता सुब्रत विश्वास कर रहे हैं, जिनकी अगुवाई में देश के विभिन्न राज्यों में लगातार बैठकें और सभाएँ आयोजित की जा रही हैं।हाल ही में बलरामपुर के 63 ग्राम पंचायतों में आयोजित जनसभा में समाज के प्रमुख व्यक्तियों और युवाओं ने एकजुट होकर सुब्रत विश्वास के नेतृत्व का पूर्ण समर्थन किया। कार्यक्रम का मुख्य विषय रहा — “एक राज्य में अधिकार, दूसरे राज्य में वंचना — कब तक?”भाषा व संस्कृति की रक्षा की पुकारसुब्रत विश्वास ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यदि अपनी भाषा और संस्कृति को बचाना है तो एकजुट होकर अधिकार की लड़ाई लड़नी होगी। उन्होंने कहा, “बांग्ला भाषा हमारी पहचान है, और इसकी रक्षा ही हमारे अस्तित्व की रक्षा है।”उन्होंने यह भी कहा कि देश के कई राज्यों में बंगाली समाज के लोगों को सिर्फ बांग्ला बोलने पर “बांग्लादेशी” कहकर अपमानित किया जाता है, जो राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द के खिलाफ है।जातीय हिंसा और भेदभाव पर नाराज़गीसभा में वक्ताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ और उड़ीसा क्षेत्रों में बंगाली भाषी समाज को लगातार जातीय हिंसा और सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। कुछ भड़काऊ बयानों के कारण समाज के व्यापारिक और ग्रामीण क्षेत्रों में तनाव बढ़ा है, जिसकी समाज ने कड़े शब्दों में निंदा की।श्रीदाम ढाली ने कहा कि हालात तब तक नहीं बदलेंगे जब तक हर राज्य में बंगाली समाज को समान संवैधानिक अधिकार नहीं मिलते। उन्होंने स्पष्ट कहा, “अब समय आ गया है कि गांधी के रास्ते से आगे बढ़कर सुभाषचंद्र बोस के संघर्ष के मार्ग पर चलना होगा।”स्थानीय नेताओं का समर्थनकार्यक्रम में क्षेत्र के युवा बंग अध्यक्ष मनोज मंडल ने कहा कि बंग समाज अपनी पहचान की रक्षा के लिए हर संभव बलिदान देगा। उन्होंने कहा, “हमारा खाल समाज का है और कपड़ा पार्टी का — जब जरूरत होगी, कपड़ा उतार देंगे पर खाल नहीं बदलेंगे।”सभा में शंकर सरकार, पवित्र घोष, भुवन बड़ाई, मोनिका साहा, कमलेश हालदार, मिहिर राय, और जयंत ढाली सहित सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।दिल्ली चलो — एकता की नई पुकारसभा के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि देशभर के बंगाली समाज को दिल्ली में एकत्रित होकर संसद के सामने अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि बंगाली समाज केवल पश्चिम बंगाल में नहीं, बल्कि भारत के 18 राज्यों में फैला हुआ है, और अधिकतर भाजपा-शासित राज्यों में उनके साथ अन्याय बढ़ रहा है।सुब्रत विश्वास ने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह को यह समझना चाहिए कि मातुआ समाज केवल बंगाल का नहीं है, बल्कि उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर राज्यों में भी उनकी बड़ी आबादी है। उन्होंने मांग की कि सभी राज्यों में बंगाली समाज को समान सामाजिक और आर्थिक आरक्षण का लाभ मिले, तभी सच्चे अर्थों में समाज को सम्मान मिलेगा।शंकर सरकार, मनोज मंडल, पवित्र घोष, भुवन बड़ाई, मोनिका साहा, कमलेश हालदार, नारायण साना, मिहिर राय, श्रीराम दे, जयंत ढाली, प्रेमानंद मंडल, तपन राय, समर मृधा, विधान ढाली, दीपंकर हालदार, सुधामय विश्वास, नमिता विस्वास, खोकन मंडल, गोलक मंडल, परमेश मंडल, इंद्रजीत विस्वास, कार्तिक वैध, जतन विश्वास, वृंदावन मंडल, तरुण पल्लव, स्वपन देवनाथ, रंजीत मण्डल, रविन्द्र सरकार, राकेश मित्र, पतिराम मण्डल, गोकुल हीरा, स्वरूप हालदार, आशीष मालाकार, राजू हालदार, प्रहलाद सरकार, पिनाक चक्रवर्ती, बुद्धदेव सरकार, सुनील सदियाल, आलोक विस्वास, गौरंग सरकार, गणेश दास, रंजीत कर, अनिल तालुकदार, रोहित विस्वास, कनाई देवनाथ, स्वपन सरकार, शिवशीष पाण्डेय, स्वपन सरकार, सुधांशु खराती, सुजीत दास, देवाशीष बड़ाई, असीम पाल, दिलीप विश्वास, अशोक मृधा, रमेन मण्डल आदि लोग उपस्थित हैं





